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Poem on International Women’s Day

16 Mar 2026 8:40 PM | Anonymous

- By Asha Singh

महिला दिवस की बधाई !

नारी !

हैं भँवर छुपे मन के अंदर

औ’अधरों पर मुस्कान लिए,

पल पल मरती जीती है वो

यूँ खुशियों के अरमान लिए।

नव जीवन देने वाली जो

तरसे वो नित जीने के लिए,

भर देती उजाला नयनों में

ख़ुद पीड़ा की अनुभूति लिए।

कर्मठ है और समर्पित है

जग में खुशियाँ भरने के लिए,

कई बार उपेक्षित होती है

अपमान का कड़ुआ घूँट पिए।

मुस्कान बिखेरे अधरों पर

चुप रहे अधर को अपने सिए,

क्षमता आकाश को छूने की

अपने काटे पंख धरती के लिए।

तन से कोमल ,नाजुक है बहुत

मन में उसके है शक्ति अपार,

कभी ऐसे दृश्य दिखा देती

मुग्ध जिसे देखे संसार ।

वो नारी है एक नारी है

हर रिश्तों की सौगात लिए,

हस्ती भी मिटा देती अपनी

मेरे श्रृद्धा सुमन हैं उसके लिए।

आशा


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